प्रकटो 'ब्राह्मण राम' हमारे
चला राम का चपल कुठारा
दुष्ट दुखी, सज्जन सुखियारा
हर आतंकी क्षत्रिय मारा
नहीं राम निज धाम पधारे
प्रकटो 'ब्राह्मण राम' हमारे
राम-श्याम निज-निज युग गामी
परशुराम हर युग के स्वामी
राम-श्याम के कारज पूरे
परशुराम के अभी अधूरे
हँसते खड़े भ्रूण हत्यारे
प्रकटो 'ब्राह्मण राम' हमारे
घर में बंदी पड़ी भारती
विषकन्या की सजे आरती
भ्रष्ट गटकते लहू देश का
सेकुलर लेते रस क्लेश का
रुद्ध पड़े गंगा के धारे
प्रकटो 'ब्राह्मण राम' हमारे
ब्रह्म तेज की लपट जगाओ
तत्पर परशुराम प्रकटओ
तप्त साधना के अँगारे
सत्य सनातन के उच्चारे
ठाकुर जी को ब्राह्मण प्यारे
प्रकटो 'ब्राह्मण राम' हमारे
ब्राह्मण का कुंठित मन जागे
बन उच्छ्वास प्रभंजन जागे
दर्प दलन वह वामन जागे
सबल सनातन ब्राह्मण जागे
जागें विप्र छलों के मारे
प्रकटो 'ब्राह्मण राम' हमारे
